सर की सूजन से कुछ आराम मिला ही था कि अचानक फिर सर बज उठा . हम सोचे ..कि अब क्यों सैंडल रानी हम पर बजी पर देखा तो सैंडल रानी नहीं बल्कि जूता महाशय थे …हमने उनसे पूछा कि भाई अब आपको क्या आपत्ति है .तो वो बोले कल आपने “जूते की प्रेमिका सैंडल रानी” क्यों लिखा अपने चिट्ठे पर .हमने कहा कि अरे ये तो जग जाहिर ही है कि….

वो बोले ये तुम्हारी दुनिया में जग जाहिर होगा हमारी दुनिया में नहीं .

हम बोले…लेकिन वो तुम्हारी प्रेमिका तो हैं ना ..

हाँ हैं लेकिन यह हमारी पत्नी जूती को नहीं ना मालूम ..

अब तो जैसे हमें सारी बात समझ में आ गयी ..हमने हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए पूछा लेकिन ये बात तो बहुतों को नहीं पता कि जूती आपकी पत्नी हैं और फिर आपको कभी जूती के साथ देखा भी नहीं .

कैसे देखोगे!!… अक्सर लोग प्रेमिकाओं के साथ ही देखे जाते हैं. पत्नियों को तो घर की रसोई से ही फुरसत नहीं . इसीलिये तो आजकल कुछ प्रगतिशील महिलाओं द्वारा रसोई को घर से बाहर निकालने का अप्रगतिशील आंदोलन खड़ा किया जा रहा है .

हमने दिखने और विचारों में युवा किंतु उम्र में 12-13 साल बड़े ब्लौगर की तरह चिंता जताई. अरे रसोई बाहर हो जाएगी तो फिर घर में रस ही नहीं रहेगा .

भाड़ में जाओ तुम और तुम्हारा रस ..पीछे से आती ये आवाज जूती महोदया की थी.अरे क्या हम औरतें घर में रहकर सजने संवरने में ही दिन बिताऎं और तुम आदमी लोग फुरसत से ब्लौग पे ब्लौग लिखो वो भी इतने लंबे लंबे ..अरे अब हम लोगों ने भी सोचा है कि हम भी ब्लौग लिखेंगे.. पर क्या करें कहां से लायें समय ..इसीलिये बच्चों और पतियों के टिफिन के साथ छोटी छोटी कविताऎं ही पैक कर पाते है ..हम तो वोट देने जाते हैं तो भी बच्चों को ले के जाना पड़ता है..

हम जब तक रवीन्द्र नाथ टैगोर के किसी अंग्रेजी लेख का हिन्दी तर्जुमा सोचते वो फिर बोल उठी..

तुम लोग घर से बाहर निकल कर ना जाने कहां कहां मटरगस्तियां करते फिरते हो और हमें कभी घर से बाहर भी नहीं ले जाते ..ये नहीं कि कभी कोई पिक्चर ही दिखा दो . अब हमने भी पिलान बनाया है कि हम भी उ नई पिक्चर प्रोवोक्ड देखेंगी और उससे कुछ प्रेरणा लेंगी ….

हम लिखने तो बैठे थे जूते का भूत यानि इतिहास पर अब हमें जूते का (उज्जवल?) भविष्य नजर आने लगा. ..आगे क्या हुआ ..ये बताएगे बाद में… अभी तो चले ऑफिस ..

Advertisements