May 23, 2007
जब रवि जी ने बताया कि भोमियो में अब प्रोक्सी सर्वर के द्वारा बहुत सी भाषाओं मे लिप्यांतर की सुविधा है तो बहुत से चिट्ठाकारों ने अपने अपने चिट्ठे मे लिप्यांतर का कोड लगा दिया.इसे लगाने में देर मैने भी नहीं की और अपने ब्लॉगस्पॉट वाले चिट्ठे पर इसे लगा दिया.
तब तो लगा नहीं कि इससे कुछ लाभ भी होगा लेकिन चुंकि रवि जी कह रहे थे कि ये बड़े काम की चीज है तो इसे लगा ही दिया.आज उसका पहला लाभ पता चला. जब मेरी सात दिन पहले लिखी हुई पोस्ट पर उड़िया भाषा में एक टिप्पणी मिली.
” ବହୁତ ସୁନ୍ଦର ବ୍ଲୋଗ୍ ଟିଏ କରିଛନ୍ତି. ଯାହା ହେଉ ଓଡିଆ ଲିପିରେ ଏହାକୁ ପ୍ରକାଶନ କରିଥିବାରୁ ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଅଶେଷ ଧନ୍ୟବାଦ ଜଣାଉଛି. ଏହାର ଅନୁକରଣ କରି ଆପଣ ଏକ ଓଡିଆ ଭାଷାରେ ବ୍ଲଗ୍ ଟିଏ ନିର୍ମାଣ କଲେ ପ୍ରୀୟ ଓଡିଆ ଭାଇ ଭଉଣୀ ମାନେ ଆପଣଙ୍କ ଉପରୋକ୍ତ ସୁନ୍ଦର ହସକଥା ଗୁଡିକର ମଜା ନେଇ ପାରିବେ.
ଧନ୍ୟବାଦ
ବନ୍ଦେ ଉତ୍କଳ ଜନନୀ “
हिन्दी में लिप्यांतर किया तो कुछ ऎसा था.
” बहुत सुन्दर ब्लोग् टिए करिछन्ति. याहा हेउ ओडिआ लिपिरे एहाकु प्रकाशन करिथिबारु मुँ आपणङ्कु अशेष धन्य़बाद जणाउछि. एहार अनुकरण करि आपण एक ओडिआ भाषारे ब्लग् टिए निर्माण कले प्रीय़ ओडिआ भाइ भउणी माने आपणङ्क उपरोक्त सुन्दर हसकथा गुडिकर मजा नेइ पारिबे.
धन्य़बाद
बन्दे उत्कळ जननी”
मैं बहुत ज्यादा उड़िया तो नहीं जानता लेकिन जितना जानता हूँ उससे लगता है कि मेरे उड़िया पाठक कहना चाहते हैं कि
” आपने बहुत सुन्दर चिट्ठा बनाया है. इसका उड़िया भाषा में प्रकाशन किया इस हेतु मेरा धन्यवाद . ..इसी का अनुकरण कर ….(आगे समझ नही आता) …इस सुन्दर व्यंग्य को पढकर मजा आया.”
तो ये है भोमियो का फायदा. इसलिये जिन्होने अभी तक इसे नहीं लगाया है इसे जल्दी से लगा लें …
May 23, 2007 at 11:47 pm
यह तो कमाल हो गया। भोमियो के लिए एक बार फिर पीयूषजी को धन्यवाद।
May 24, 2007 at 12:15 am
हां जी, ये भोमियो उर्फ पीयूष का कमाल है. लैंग्वेज बैरियर को खत्म करने का एक अदना सा, परंतु ठोस प्रयास. पीयूष को फिर से साधुवाद!
May 24, 2007 at 12:54 am
यह भी ख़ूब रही ।
May 24, 2007 at 12:54 am
ओड़िआ का पहला ब्लॉग मेरा है। यहाँ देखें। यहाँ भी मैंने भोमियो के बहुलिप्यन्तण लिंक दिए हैं।
May 24, 2007 at 2:13 am
Hello Sir
Few Hours ago, i had sent u an comments written in oriya. In which i mentioned that” Really nice blog, and unicode font will bring a revoulation in the websites. If the site will publish in oriya language then the oriya reader can take its taste.”
Any way the fonts are oriya but translitrate of Hindi. It has also a unique style.
Thnx
Diptiranjan
May 24, 2007 at 5:45 am
भोमियो-भोमियो
यूरेका-यूरेका
May 24, 2007 at 9:23 am
[...] Advantage of Bhomiyo [...]
May 24, 2007 at 10:50 am
लगाते हैं भाई!! सब लगा रहे हैं तो हम ही काहे छूट जायें.
June 4, 2007 at 8:22 am
Kakeshji,
Doosara fayada bhi note kar lijiye. Agar aapaki site ki link transliteration dwara maujud hai to fir search engine use doosari language main index bhi karata hai.
Google pe “ham bhee hai” par search marake dekhiye, ya fir, “”Kakesh pe search kariye. Aapaki site turant aati hai.
October 8, 2007 at 2:58 am
काकेश भाई ‘ओडिया-राष्ट्रवाद’ से ओतप्रोत आपका टिप्पणीकर्ता आगे कहता है ,”आप ओडिया-भाषा में भी एक ब्लॉग बनाइए जिसमं छपे व्यंग्य लेखों का आनन्द ओडिया-भाई-बहन ले सकें”